posted on : दिसंबर 10, 2022 2:03 pm
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उत्तरकाशी: रिलीज हुआ देवलांग पर लिखा दिनेश रावत का गाना, जानें क्यों है खास

बड़कोट: उत्तरकाशी जिले के नौगांव ब्लॉक की बनाल पट्टी के प्रसिद्ध मेले देव पर्व देवलांग पर अब तक का सबसे तथ्यात्मक हारुल (गाना) लॉन्च हो गया है। गाना साहित्यकार दिनेश रावत ने लिखा है। इस गाने को रेश्मा शाह ने आवाज दी है। गाने को इस तरह से पिरोया गया है कि उसमें देवलांग के आयोजन को आसानी से समझा जा सकता है।

देवलांग की हारुल में देवलांग की तैयारियों से लेकर देवलांव के खड़े होने और वहां से राख को मड़केश्वर महादेव तक ले जाने की पूरी जानकारी दी गई है। किस तरह से देवलांग को लेकर लोगों में उत्साह रहता है, वह भी इस गाने में शामिल किया गया है। इससे लोगों को भी देवलांग पर्व के बारे में जानकारी मिलेगी। देवलांग रवांई घाटी का सबसे बड़ा पर्व है। इसे दखने के लिए केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों के लोग पहुंचते हैं।

साहित्यकार दिनेश रावत ने बताया देवलांग पर कई तरह के गाने और हारुल पहले भी बन चुके हैं, लेकिन इस हारुल के जरिए देवलांग की प्रत्येक जानकारी को लोगों के सामने लाना था। गाने को जीवंत बनाने के लिए देवलांग के दिन ही गैर गांव में शूटिंग की गई। कुल मिलाकर देखा जाए तो गाना देव पर्व देवलांग की पूरी जानकारी लोगों तक पहुंचाने में सफल रहा है।

कई तरह की प्रतिक्रियाएं

देवलांग मेले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। डेल्डा के आशीष उनियाल ने लिखा है कि रावत जी ने मेरी आपसे इस गीत के विषय में एक दिन चर्चा हुई थी कि कैसे आपने अपना कीमती समय निकालकर कोविड की ड्यूटी में भी यह गाना बनाया, बहुत बधाई जय मुलुकपति राजा रघुनाथ।

जसवंत चौहान का कहना है कि दिनेश रावत जी को बहुत बहुत बधाई एवं धन्यवाद, जिन्होंने अपने अथक प्यास से बनाल की संस्कृति को लोगांे के बीच लाने कार्य किया। राजा रघुनाथ जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे और आप अपनी लेखनी से नए-नए आयाम स्थापित करें।

अशिता डोभाल (अशी) ने लिखा है कि रंवाई घाटी की समृद्ध संस्कृति और परम्पराओं को देश-दुनिया को किताबों और कविताओं के माध्यम से पहुंचाने वाले बड़े भाई जी दिनेश रावत जी अब गीतों के माध्यम से भी यहां के लोकरंगों को लोगों तक पहुंचाने की मुहिम भी शुरू कर चुके हैं। शानदार भाई जी आपने अब एक नया अध्याय शुरू कर दिया है। आप पर राजा रघुनाथ की कृपा बनी रहे।

ये रही कमी
हालांकि, हारुल में कई जगहों पर शब्दों का उच्चारण सही ढंग से नहीं हो पाया है। कुछ चीजें अधूरी सी नजर आती हैं, जो मूल रचना में नहीं हैं। मूल रचना से हटकर कुछ शब्दों को बदल दिया गया है। शब्दों के उच्चारण की कमियां भले ही संगीत के साथ जल्द पकड़ में ना आती हों, लेकिन मूल रचना पढ़ने के बाद इसे आसानी से समझा जा सकता है।

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