उत्तराखंड : नगर निगम में बड़ा गड़बड़झाला, 60 करोड़ की चपत, RTI में चौंकाने वाला खुलासा

  • पार्षदों ने दून नगर निगम को 60 करोड़ की लगाई चपत।

  • स्वच्छता वर्कर के तौर भी सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर के लोगों को दे दी नौकरी।

  • गुणानंद जखमोला 

देहरादून नगर निगम का वार्ड आठ। यहां तुषार गोदियाल और महेश नैथानी वार्ड में झाडू मार रहे हैं और कूड़ा उठा रहे हैं। यहां दो शुभम हैं, जिनका पता 3 और 4 सालावाला हाथीबड़कला दिया गया है। कुल सूची में लगभग 20 से भी अधिक शुभम हैं जिनका कोई पता नहीं है। वार्ड नौ में आशा शर्मा, निखिल चौहान, अर्जुन सिंह भी झाडू मार रहे हैं और कूड़ा उठा रहे हैं।

 

वार्ड 23 में आशा चौहान, मीनाक्षी सूद, रजत चौधरी, उषा और अंजना भी सफाई कर्मी हैं। वार्ड 30 में किरतपुर बिजनौर का महिपाल झाडू लगाता है। वार्ड 36, 39, 41 में भी सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बदायूं और बिजनौर के विक्की-बबली जैसे कर्मचारी हैं। यही नहीं गुप्ता, गहलोत, यादव भी इन कर्मचारियों में शामिल हैं। मेरे पास सभी 100 वार्ड के एक-एक कर्मचारी की डिटेल सूची उपलब्ध है।

कुल मिलाकर नगर निगम के 100 वार्डों में से कुछ वार्डों को छोड़कर अधिकांश में भारी गड़बड़ियां हैं। पार्षदों ने जनता को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। एक अनुमान के मुताबिक निवर्तमान पार्षदों ने नगर निगम को लगभग 60 करोड़ की चपत लगाई है। यह खुलासा RTI एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी को मिली जानकारी से हुआ है।

RTI से पता चला कि 100 वार्डों में 1021 कर्मचारियों को मोहल्ला स्वच्छता समिति के नाम से वर्ष 2019 में तैनात किया गया था। इनको प्रति दिन 500 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाता है। बताया जाता है कि यह भुगतान पार्षद के माध्यम से किया जाता है। अधिकतर पार्षदों ने फर्जी लोगों की तैनाती की है। नाम भी पूरा नहीं है और न ही उनका पता है।

सबसे अहम बात यह है कि इन प्रक्रिया को वित्तीय स्वीकृति किसने दी। पार्षदों द्वारा तैनात कर्मचारियों के भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया गया? इस घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार है? निगम की प्रशासक DM सोनिका ने भी भौतिक सत्यापन की आदेश दिया तो पता चला कि अधिकांश कर्मचारी हैं ही नहीं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि नगर निगम में कैसी लूट मची है।

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posted on : January 9, 2024 8:31 pm
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