खबर का बड़ा असर: श्री देव सुमन विश्वविद्यालय में इंटरव्यू कैंसिल, इस मामले में जांच जारी…

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posted on : दिसंबर 5, 2023 2:56 pm

देहरादून: पहाड़ समाचार की खबर का बड़ा असर हुआ है। पहाड़ समाचार ने श्री देव सुमन विश्वविद्यालय का कारनामा, “नौकरियों में पहले भी किया गड़बड़झाला, एक बार फिर कर रहा तैयारी!” हेडिंग के साथ एक जून को खबर प्रकाशित की थी। जिसका संज्ञान उच्च शिक्षा विभाग ने लिया, जिसके बाद श्री देव सुमन विश्वविद्यालय ने कल यानी 7 जून को होने वाले इंटरव्यू कैंसिल कर दिए।

श्री देव सुमन विश्वविद्यालय ने कंप्यूटर प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता सिविल, कंटेंट राइटर, इलेक्ट्रिशियन और पलंबर की भर्ती निकाली है। इसके लिए श्रम विभाग के प्रचलित नियमों के अनुसार भर्ती की बात कही गई है। भर्ती वाक-इन-इंटरव्यू के जरिए की जाएगी। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय श्रम विभाग के उस शासनादेश के तहत भर्ती कर रहा है, जो विश्वविद्यालय पर लागू ही नहीं होता है।

आदेश में गड़गड़ी
हालांकि, श्री देव सुमन विश्वविद्यालय की ओर से जो आदेश जारी किया गया है। उसमें भी गड़बड़ी है। दरअसल, यूनिवर्सिटी ने भर्ती के लिए सीधे इंटरव्यू के जरिए भर्ती का विज्ञप्ति 27 मई को जारी की थी। जबकि, निरस्त करने वाले आदेश में जारी करने की तारीख 2 मई लिखी गई है। जबकि, वह दो जून होने चाहिए था। मामले में पहाड़ समाचार ने एक जून को समाचार प्रकाशित किया था।

इसको लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे थे। इससे पहले हुई भर्ती भी श्रम विभाग के उन नियमों के आधार पर कर दी गई थी, जो मदरसा बोर्ड पर लागू होंते हैं। इससे पूर्व में भी विश्वविद्यालय के मुख्यालय और ऋषिकेश परिसर में विभिन्न पदों पर भी श्रम विभाग के उस शासनादेश के तहत भर्ती कराने के बाद वेतन भी आहरित किया जा रहा है, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। जिस जीओ के माध्यम से इनका वेतन निकालस जा रहा है। वह विश्वविद्यालय पर लागू ही नहीं होता, ऐसे में इन कार्मिकों को कैसे वेतन दिया जा रहा है। यह अपने आप में गंभीर सवाल तो खड़े करता ही है। साथ ही यह वित्तीय अनियमितता का मामला भी है।

उत्तराखंड: श्री देव सुमन विश्वविद्यालय का कारनाम, नौकरियों में गड़बड़ी, एक बार फिर तैयारी!

जिस शासनोदेश के आधार पर भर्ती की गई है। उसकी पहली बात तो यह है कि वह शासनादेश यह है कि वह उन मदरसों पर लागू होता है, जिनमें फीस नहीं ली जाती है। उन प्राइवेट स्कूलों के लिए भी मान्य है, जो किसी संस्था की ओर से संचालित हैं और या तो फीस नहीं लेते हैं या फिर नाम मात्र की फीस लेते हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए फीस ली जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यही उठता है कि इसके आधार पर भर्ती कैसे की गई।

ऋषिकेश परिसर में जो गेस्ट फैकल्टी लगाई गई है, उनकी नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय ने शासन से कोई अनुमनि प्राप्त ही नहीं की है। बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय को इसके लिए शासन से अनुमति लेनी होती है। विश्वविद्यालय की मनमानी का आलम यह है कि किसी भी रेगुलेटरी बोर्ड से इस संबंध में कोई अनुमति नहीं ली गई।

विश्वविद्यालय ने एक बार फिर विभिन्न पदों पर दैनिक वेतनभोगी कार्मिक नियुक्त करने के लिये विज्ञापन जारी किया, जो कि विवादों में आ गया है। विश्वविद्यालय ने उक्त विज्ञापन में ऐसे पदों पर दैनिक वेतनमान पर कार्मिक रखेगा जो समूह ‘ख’ के पद हैं।

बहरहाल इन नियुक्तियों के मामले में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले में सचिव को जांच करने के लिए कहा गया, जिसकी जांच भी शुरू हो गई है।

वहीं, इस मामले में वित्तीय अनिमितता को लेकर विश्वविद्यालय की वित्त अधिकारी नीलू वर्मा का कहना है कि नियुक्तियां कार्मिक विभाग करता है। उनके संज्ञान में जांच की बात है, लेकिन अब तक जांच के आदेश उनके पास नहीं पहुंचा है। जैसे जांच के आदेश प्राप्त होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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