posted on : फरवरी 30, 2022 10:24 am
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उत्तराखंड: सबसे बड़ा भर्ती घोटाला, सगे भाई हुए थे पास, एक ही गांव के 20 लोगों का चयन

देहरादून: उत्तराखंड के माथे पर भर्ती घोटालों का दाग लग गया है। हालांकि, CM धामी ने भर्ती घोटालों के इस दाग को धोने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन, राजनीति जानकारों की मानें तो उनकी राह में रोड़े भी अटकाए जा रहे हैं। उनका राह से सभटकाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वो पूरी मजबूती से खूंटा गाढ़े हुए हैं। उन्होंने STF को भर्ती घोटालों की जांच की खुली छूट दी है। एक और भर्ती घोटाले की जांच STF शुरू करने जा रही है।

UKSSSC की 2016 में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती मामले में झोले में ओएमआर शीट लेकर घूमने वालों की अब STF तलाश करेगी। जब इस परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी, OMR शीत के साथ छेड़छाड़ की गई थी। UKSSSC ने छह मार्च 2016 को VPDO के 196 पदों पर भर्ती की परीक्षा कराई थी। इसका परिणाम उसी साल 26 मार्च को जारी किया था। इस भर्ती में आरोप लगे थे कि ओएमआर शीट को दो सप्ताह तक किसी गुप्त स्थान पर रखकर छेड़छाड़ की गई है। इसके बाद रिजल्ट जारी किया गया।

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जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ था कि, जहां OMR शीट के मूल्यांकन को स्कैनिंग होती थी, वहां CCTV भी नहीं लगा था। मामले में विजिलेंस ने मुकदमा तो दर्ज किया था लेकिन, नौकरी माफिया तक नहीं पहुंच पाई थी। अब STF उन अधिकारियों की तलाश में जुट गई है।

VPDO भर्ती में दो सगे भाई टॉपर बन गए थे। ऊधमसिंह नगर के एक ही गांव के 20 से ज्यादा युवाओं का चयन हो गया था। भर्ती घोटाले मामले में तत्कालीन CM हरीश रावत ने उच्च स्तरीय जांच बैठाई थी। इसी भर्ती में गड़बड़ी सामने आने के बाद अध्यक्ष RBS रावत ने इस्तीफा दिया था। 2017 में EX CM त्रिवेंद्र ने इस भर्ती को हाईकोर्ट के आदेश पर रद्द कर जांच बैठा दी थी। विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था।

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हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2017 को VPDO भर्ती को निरस्त कर दोबारा लिखित परीक्षा कराने के आदेश दिए थे। आयोग ने 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार परीक्षा कराई। इस परीक्षा में पहली परीक्षा में जो चयनित हुए थे, वो भी परीक्षा में शामिल हुए था, लेकिन पहली बार की परीक्षा में चयनित हुए 196 अभ्यर्थियों में से दूसरी परीक्षा में केवल 8 का चयन हुआ था।

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